अब वक़्त है कम

अब वक़्त है कम

यूँ तो ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं,
मगर उम्र के जिस पड़ाव पर हैं भाई,
कह सकते है गुज़री है अब तक जितनी,
मान लो नहीं है ज्यादा मेरे भाई,
इस पड़ाव पर शुरुआत हो नहीं सकती,
हां समझौता ही सम्भव और है सही।

उम्र का ये दौर आशंकित आतंकित है।
कब किस वक़्त जाने सांसे रह जाय थमी।
अब तलक दौरे मिलना जुड़ना था,
अपने से अपनों में बसना था,
अब दौर-ए-बिछड़ना है।

अपनों के जनाज़े देखना,
पाक सफर में कांधे देना,
घड़ी दो घड़ी ग़म ज़दा,
अफ़सोस अदा करना ही रस्में करनी है अदा।

कुल मिलाकर अब,
समय गिनती का है,
खुद विदा होने से पहले
अपनों को शुभचिंतकों को
बिछड़ते देखना है।
जितना जियो ज्यादा टूटते रहना है।

— नरेश कुमार ^सनातन*

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

Leave a Comment

Keep reading

You may also like

तो जलता है बदन ! Hindi

तो जलता है बदन !

■ तो जलता है बदन ■ तुम्हे खुद से ख़ुद में देखु उर से उर में मचलु तो जलता है बदन -2…

November 8, 2021 Read →
ज़ल रहे हैं !!!!!!! Hindi

ज़ल रहे हैं !!!!!!!

मै जल रहा हूँ ,लोग ज़ल रहे है सत्ता के गलियारे में देश ज़ल रहे हैं। शान्ति अमन चैन के मुखड़े मूक…

March 12, 2020 Read →
हमसाये हमराज के Hindi

हमसाये हमराज के

** हमसाये हमराज के*** गम नही शराब पीता हु बेहद बेहिसाब पिता हु इसलिए नही की गम ओ रंज हैं मुझे ओर…

April 16, 2020 Read →