नाक ऊँची होना सुना है एक मुहावरा
नाक चढ़ना मुहावरा सुना होगा।
चेहरे पर सजी शान कवियों ने लिखा।
चेहरे पर दो खाली प्लाट दो गाल,
मगर उन पर भी बहुत लिखा है।
मैंने लिखा है दो इंच पर बने, नाक के मकान-मकाम पर
आँखे सुन्दर मगर नाक भव्य लगती है।
आँखे शर्मो हया पर नाक इज्जत मानी जाती है।
जैसे संज्ञा के प्रकार है, फसलों के भी,
ठीक नाक के भी प्रकार साइज़े होती है।
तो सुनिये नाकों के प्रकार,
नाक तोतापुरी, नाक सारसमुखी, नाक उल्लुनुमी,
नाक सूर्यमुखी, नाक हंसमुखी,
नाक कोयलमुखी, नाक गजमुखी,
नाक गरुड़मुखी, नाक बाज़मुखी, नाक ऊँट मुखी,
नाक कद्दू नुमी, नाक लौकी नुमा,
नाक बैंगन रूपी, नाक भजिया नुमा,
नाक अंगुरी, नाक आम रूपी, नाक सेब रूपी।
कुल मिलाकर नक्श अच्छी, जब नाम हो सच्ची,
बाकी शिकायत उस विश्व रचयिता से,
बस इतना ही, आप है, मैं हूँ
फैसला करे खुद ही ये मामला आपका है।
— नरेश कुमार ^सनातन*