जाने वाले चले गए….
जो छूटे उनके पीछे…
वो हमारे हैं !!
जाहिर है हम किसी का दुख ले नहीं सकते,
बांट भी नही सकते
मृत्यु का दर्द उसी को गहरा है
जिनका कोई अजीज खोता है…
सदमा ये बहुत बड़ा गरल सा है ।
बस ओपाचारिकता के संसार में संसार बंधा है
बस ये खालीपन उनको ही भरना है !!!
हम सामाजिक प्राणी
सामाजिक सरोकारों में हर कोई बंधा है,
बस हम जा सकते है
इक शुभचिंतक बन कर
सांत्वना जताने ढाढस दिलासा देने
और इससे बढ़ कर जहां में कोई सिला है
और ये चलन संसार में सबसे बड़ा है !!!!!
*Nk सनातन