रीडर्स अब वो क्या रहे ही नहीं!

रीडर्स अब वो क्या रहे ही नहीं!

फिटकरी या पोटाश (Alum) जल को शुद्ध करने की ओकात रखती है
*वाचक
*जांचक
*भाषक
*आशक
(आशक आशिक का अपभ्रंश अपनी हिंदी अपनी उर्दू कहले कोई इक कहेगा तो दूसरा तीसरा चौथा
और फिर भाषा प्रचारिणी सभा में इस शब्द को आधिकारिक रूप से स्वीकृत कर लिया जाएगा)
देश में पाठक और वाचक वर्ग बहुत कमतर हो गया है…और लेखक कवि वर्ग बहुत बढ़ गया है इसमे ये बात जाहिर है लिख वही सकता है जिसने कभी पढ़ा है और मनन चिंतन मंथन रंजन भंजन किया है…तो साफ है सब ज्ञानी हो गए है और इसलिए कोई किसी का पढ़ना नहीं चाहता …
तो सब ज्ञानी तपस्वी मनस्वी मनीषी तो सवाल सनातन हम सब किसके लिए लिख रहे है रच रहे है घड़ रहे हैं…!!!!
ऐसे में बॉलीवुड के काका सुपर स्टार लवर बॉय राजेश खन्ना का मशहूर संवाद (फिल्म दाग) की इज्जते दौलते शोहरते,उल्फते दुनिया में सदा रहता नही(ये डायलॉग सभ्रांत दर्शक दीर्घा में बोल रहे थे अपनी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सेरेमनी में) …
फिर कहते है ये मैं क्यों बता रहा हू…
ये पब्लिक है सब जानती है ये पब्लिक है…!!!!!

*NK सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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