प्रिय पाठको नमस्कार, आदाब, वणीक्कम, शतश्रीकाल…..जीवन में रोने को बहुत कुछ है या यू कहे कई कारण और कारक है और हंसी, ख़ुशी ,प्रसन्नता के कारण बहुत कम हैं । मेरे समृद्ध पाठक गण साथियों मैने इक लघु हास्य व्यंग्य का चटकारा रचा है आपके अनुरंजन मनोरंजन और आनंद के लिए ..…मुझे विश्वास है इसका रसास्वादन यानी मन से पढ़ के आप आनंद की दुनिया में विचरण करेंगे…तो। मित्रो आपकी नजर ये जोक्स …
बस यूं ही नही बस यू ही
इक 80 साल के बुजुर्ग ने कहा~~हे परमेश्वर मुझे उठा ले !
ईश्वर ने कहा~
ऐसे कैसे उठा ले तुमको
अभी तो हिसाब बहुत बाकी है…!
तुम्हे बहुत कुछ भुगतना है यही इस धरती पर…
कभी पीछे मुड़ के तोला है अपनी जिंदगी को…
स्वर्गीय होने पर तो मज़े ही मज़े है ! इसलिए सॉरी मानव…
बुजुर्ग~भगवन
भगवान~भगवन वगवन कुछ नही..और लोप यानी ईश्वर अदृश्य हो गए..
और पूरा पूरा..संसार में भुगतने के बाद जब वह बुजुर्ग स्वर्ग पहुंचा .. वहां भगवान से उसने कहां की ईश्वर मैं आपसे धरती पर मिल चुका हूं जब मैने आपसे मरने की गुहार की थी…
ईश्वर ने कहा~अरे नादान मैं कभी धरती पर जाता ही नही
बुजुर्ग~तो वो कौन थे जो मुझे दिखे और संवाद हुवा
ईश्वर ~अरे नादान वो धरती पर अवतरित दानव देवाधिराज यानी दानवों का महाराजा था
बुजुर्ग~सुन चौंका..
भगवान वो दानव था
ईश्वर~हां हमने आदि काल से धरती का ठेका दानवों को दे रखा है…वही सब वसूल करता है
बुजुर्ग~क्यों..
परमेश्वर~क्योंकि सारे पापो के फल तुम धरती पर पीड़ा रूप में भुगत सको …दानव अभी तक हमारे कॉन्ट्रैक्ट के प्रति पूरे ईमानदार हैं…!!!!!
सनातन की कलम से ह्रदय तल से उद्गार ये की मेरा ये हास्य चुटकुला आपको निश्चित पसंद आया होगा…आपका पठन मेरी पूंजी यानी कैपिटल है ।आप मेरे इस जोक को अपने मित्रो,रिश्तेदारों,शुभचिंतकों एवम किसी को भी हस्तांतरित यानी शेयर कर कुछ पल के लिए खुशी के बाजार में खड़ा कर सकते है..आपके कीमती वक्त एवम पठन के लिए हृदय की गहराइयों से धन्यवाद
*Nk सनातन