ईंट-पत्थर के मंदिर तो बहुत हैं,
पर असली मंदिर तो भीतर है;
जहाँ रोज़ सत्य की आरती हो,
वहीं ईश्वर बिना बुलाए आता है।
ईंट-पत्थर के मंदिर तो बहुत हैं,
पर असली मंदिर तो भीतर है;
जहाँ रोज़ सत्य की आरती हो,
वहीं ईश्वर बिना बुलाए आता है।
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Bhakti
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Bhakti
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