फूलो को हम तोड़ते नही चुन चुन के चुनते हैं ;
और मुरझाने से पहले उन्हे गुलकंद बना लेते है !
*Nk सनातन
गुलकंद खाने का नहीं रसना में रमा ने को होता हैं ;
की सारे तालुव्य स्वादेंद्रियो के साथ तर हो जाए
जायके का आसमा होता है !
*Nk सनातन
तुम पुरुष हों मयखाने जाकर मुझे भूलाने की कोशिश करते हो
मैं कोमलांगना स्त्री शालीन चरित्र से जुड़ी
वहां जा नहीं सकती
फिर महिला सशक्तिकरण के नाम योरोप की तरह
मयखाना घर बुलाकर देखा
कमबख्त नशे में तुम और और मुसल्लसल बहुत याद आते हो !!
फिर खयाल दुरस्त हुआ तुम वहां मुझे भूलाने नहीं बहुत याद आऊ इसलिए जाते हो !
*Nk सनातन
हम पेड़ है अर्थियों ,जनाजो को जाते देखते हैं
अब न मालूम किनकी पीढ़ियों को जलाने काम आयेंगे जब ठूठ बन जायेंगे
या काट कर सुखा दिए जाकर ताबूत या के कोफिन बनाए जायेंगे !
*Nk सनातन