न्यायसंगत आंकड़े !
[ आंकड़े जो हर किसी के साथ न्याय नहीं करते ]
क्रिकेट हो या फुटबॉल या कोई भी खेल आंकड़ों के बल ही खिलाड़ी का कद आंका जाता है और शिक्षा में भी अंको के आधार पर ही व्यक्ति का स्तर मापा और आंका जाता है चाहे व्यावहारिक और सामान्य ज्ञान में वह व्यक्ति कितना ही प्रवीण एवम माहिर हो ,प्रामाणिकता सिर्फ अंकतालिका से ही साबित होती है चाहे वो कैसे भी ली हो साठगांठ या तिकड़म या घुस या सिफाररिश या जोड़तोड़ और ऐसे में कई अयोग्य योग्य का चस्पा और ठप्पे के तहत अच्छा खासा वेतन उठा रहे हैं! आंकड़ों के इस तराजू में कई खिलाड़ी महानता की श्रेणी से दरकिनार हो जाते है जबकि वास्तविक प्रतिभा और क्लास में उनका कोई सानी नहीं! इस विषय का सबसे बड़ा उदाहरण अभी ताजा फीफा वर्ल्ड कप (कतर,2022) जिसमें अर्जेंटीना लियोनेल मेसी की कप्तानी में चैंपियन बना और इस कप विजय ने लियोनेल मेसी को सर्वकालीन महान फॉटबॉलर्स में शामिल कर दिया क्योंकि इस उपलब्धि से उनके आंकड़े बहुत समृद्ध श्रेणी में आ गए लेकिन उनके ही समकक्ष क्रिस्टिनो रोनाल्डो जिनकी टीम पुर्तगाल क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में बाहर हो गई और उनकी महानता में ये आंकड़े अपनी भूमिका निभाते हुवे रोनाल्डो की महानता में थोड़ा बट्टा लगाने समालोचक , आलोचकों,सांख्य शास्त्रियों को हवा दे दी की आंकड़ों की दुनिया में रोनाल्डो मेसी से सेकंड के 100 वे नैनो सेकंड हिस्से से ( भारत की धाविका उर्फ उदनपरि PT ऊषा की तरह जो इस अंतराल फोटो फिनिश से गोल्ड मेडल से वंचित रही और उन्हें एशियाड में सिल्वर मेडल मिला था) पिछड़ते हैं। यानी आंकड़ों के मूल्यांकन में यही आइना होता है । खेर आंकड़ों का ये दुखड़ा लेकर मैं बात कर रहा हूं क्रिकेट खेल के कुछ क्रिकेटर्स की जो महानता की फेहरिस्त में शामिल नहीं हैं जैसे महानतम तेज गेंदबाज माने जाने वाले शेन वार्न,बॉब विलिस,एंडी रॉबर्ट्स,जेफ थॉमसन,माइक हेंड्रिक्स,जॉन प्राइस,कपिल देव, इयान बॉथम आईसीसी एक्सपर्ट पैनल द्वारा निर्धारित क्राइटेरिया में स्थान नही पाते हैं! स्मरण रहे की आईसीसी मूल्यांकनकर्ता ,आंकलन विशेषज्ञ समिति ने उन्हें पचास महान गेंदबाजों की लिस्ट में शामिल नहीं किया है क्योंकि महानता के लिए अधिकतम 25 रन का औसत होना अनिवार्य है ! और विडंबना की कुछ दशमलव या डिजिट से ये क्रिकेटर्स महानता की लिस्ट में स्थान नही पा सके हैं विशेष कर स्पिन सम्राट शेन वार्न ,रफ्तार के जादूगर एंडी रॉबर्ट और बॉब विलिस और बाउंस के डेमोन माइक हेंड्रिक और वजह से इस क्राइटेरिया पर बड़ा अफसोस होता है लेकिन मूल्यांकन के लिए कुछ तो मापन तय करना होता है क्योंकि सांसारिक और भौतिक क्षेत्र के कुछ विशेष नियम है। आकड़े व्यक्ति वाचक संज्ञा है जो दिखते है और क्लास अब्स्ट्रैक्ट नाउन है यानी भाववाचक संज्ञा है जो प्रत्यक्ष महसूस किया जाता है …. तो इस पृष्ठ भूमि के मानिंद मैं बात कर रहा हूं भारत के महान क्रिकेटर्स में से इक मोहिंदर अमरनाथ जो जिम्मी के उपनाम से क्रिकेट समाज और प्रशंसको में मशहूर हैं। यदि भारत में सबसे बड़े क्रिकेट घराने की बात करे तो अमरनाथ घराना (श्री लाला अमरनाथ, सुरेंदर अमरनाथ, महेंदर अमरनाथ एवम राजेंदर अमरनाथ) सबसे बड़ा और ख्यात घराना कह सकते हैं जिससे चार क्रिकेटर्स उत्पन्न हुवे हैं जिसमें तीन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहें और राजेंदर अमरनाथ घरेलू राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे ।
इसके बाद मांजरेकर परिवार से दो अंतराष्ट्रीय क्रिकेटर्स विजय मांजरेकर जी और संजय मांजरेकर,तीसरा सुनील गावस्कर साब और रोहन गावस्कर और पठान ब्रदर्स। क्रिकेट में लाला अमरनाथ का कद बहुत ऊंचा रहा और रहेगा और उनके बड़े सुपुत्र सुरेंदर अमरनाथ बहुत प्रतिभाशाली क्रिकेटर रहे और इक आक्रामक टॉप ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में ख्यात रहे हालाकि उनका क्रिकेट करियर सीमित रहा लेकिन उनके अनुज मोहिंदर अमरनाथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित रहे और देश का नाम अपने ज्वलंत खेल से ऊंचा किया ,रोशन किया । हालाकि चयनकर्ताओं और उनकी यारी (वेमनस्य) कुछ ज्यादा ही करीबी रही (ठनी यानी पक्षपातपूर्ण ) रही की उनके चयन को लेकर कई बार न्याय नहीं किया गया
लेकिन फिर भी जिम्मी अमरनाथ ने हर बार डोमेस्टिक स्तर पर अपना जलवा साबित कर चयनकर्ताओं को विवश किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम चमकाया।
हालाकि जिम्मी इक महान बल्लेबाज थे लेकिन उनके आंकड़े उनके क्लास या शास्त्रीयता के साथ न्याय करते नजर नहीं आते । मोहिंदर इक विशेषज्ञ बल्लेबाज रहे और टॉप ऑर्डर पर छाए रहे । मोहिंदर का बल्लेबाजी औसत 42.69 रहा जो उस समय लंबे करियर की कड़ी में महान सुनील गावस्कर के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ रहा। उस समय भारत से गुंडप्पा विश्वनाथ, दिलीप वेंगसरकर जैसे बड़े बल्लेबाज थे लेकिन मोहिंदर अमरनाथ यानी जिम्मी का बल्लेबाजी औसत उनसे अव्वल रहा यानी आंकड़ों और क्लास दोनो में अग्रणी रहे। बाद में नवजोत सिंह सिद्धू औसत में उनके आसपास रहे लेकिन उनसे आगे नही हो पाए । फिर सचिन तेंदुलकर नाम के सितारे का पदार्पण जिन्होंने आंकड़ों में सबको पीछे छोड़ दिया यहां तक की महानतम में से इक सुनील गावस्कर को भी । लेकिन सचिन तेंदुलकर युग में मोहम्मद असरुद्दीन पहले बल्लेबाज रहे जिन्होंने जिम्मी को बल्लेबाजी औसत में पीछे छोड़ा लेकिन समालोचना में अजहरुद्दीन क्लास के हिसाब से मोहिंदर से आगे नही माने जाते हैं । अजहरुद्दीन गावस्कर के बाद दूसरे बल्लेबाज रहे जिन्होंने 45 प्लस औसत अर्जित किया और उसके बाद सचिन युग में बल्लेबाजों की संख्या बढ़ गई और वीवीएस लक्ष्मण,राहुल द्रविड़, विरेंद्र सहवाग और सबसे ऊपर सचिन द ग्रेट 45 प्लस औसत धारी रहे। सौरभ गांगुली भी विशेष बल्लेबाज रहे लेकिन सौरभ जिम्मी से आगे नहीं रहे !
जिम्मी अमरनाथ ने अपने 86 टेस्ट के लंबे करियर मे कुल 11 टेस्ट शतक जड़े और आपके सारे शतक विश्व स्तरीय क्वालिटी गेंदबाजी के समक्ष विशेष परिस्थिति में बनाए गए और इसलिए उनका कद विश्व क्रिकेट में काफी सम्मानीय होकर श्रेष्ठ हो जाता है ! मोहिंदर अमरनाथ की बहादुरी और बल्लेबाजी तकनीक की सराहना महानतम श्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में शुमार इमरान खान, माइकल होल्डिंग ने की और यहां तक उनके समकालीन साथी बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी की!
तेज गेंदबाजों को खेलने के लिए दो बातों का भय रहता है इक आउट होना तो होता ही है दूसरा शारीरिक चोट का ! इसके लिए तकनीकी रूप से पूर्ण होना आवश्यक है।
यदि बल्लेबाजी औसत अनुसार रैंक की बात करे तो कम से कम 50 टेस्ट खेलने वाले बल्लेबाजों का स्तर निम्न प्रकार ठहरता है ~
1.सचिन 53.78
2.द्रविड़ 52.31
3.गावस्कर 51.13
4.सहवाग 49.34
5.कोहली 48.90+
6.लक्ष्मण 45.97
7.अजहरुद्दीन 45.03
8.पुजारा 44.39 +
9.मोहिंदर 42.50
10.गांगुली 42.17
11.दिलीप 42.13
12.नवजोत 42.13
13.विश्वनाथ 41.93
14.रोहित 46.13+
(विराट,पुजारा और रोहित जिनके सम्मुख प्लस का निशान दर्शाता है की आप तीनो का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर जारी है और देखना होगा कि आप किस औसत पर फिनिश करते हैं)
नोट: इस सूची में विजय हजारे जी को शामिल नहीं किया है जिनका बल्लेबाजी औसत 48 के करीब और पोली उमरीगर जिनका औसत 42 !
यानी भारत से अब तक 307 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले है उनमें से लगभग 160 विशुद्ध बल्लेबाज रहे हैं और भारत का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास 1932 से है यानी 90 वर्ष का लंबा सफर और उसमें सिर्फ तीन बल्लेबाज टेस्ट में 50 प्लस का औसत अपने फिनिश्ड करियर में रख पाए है और वो भी 25~50 टेस्ट नही 200,164 ,125 टेस्ट खेल कर और वो गौरवशाली बल्लेबाज है सचिन तेंदुलकर ,राहुल द्रविड़ सुनील गावस्कर । और प्लस 45 बैटिंग एवरेज की बात करे और 100 प्लस टेस्ट कैरियर की बात करे तो विरेंद्र सहवाग (104 टेस्ट ) और वीवीएस लक्ष्मण ( 134 टेस्ट) ही इस श्रेणी में आते हैं। अजहरुद्दीन 99 टेस्ट खेल 45 प्लस बैटिंग औसत निकाल सके है और आप 100 टेस्ट क्लब में शामिल नहीं हो सके क्योंकि आप उस समय मैच फिक्सिंग में लिप्त पाए गए ।
विराट कोहली अब तक104 (जनवरी ,2023 तक) टेस्ट खेल 48 बैटिंग एवरेज रख सके हैं हालाकि 70 टेस्ट तक उनका एवरेज 60 के करीब था लेकिन पश्च् इसके उनका बल्लेबाजी औसत गिरता गया और अभी 48.90 पर स्तिथ है ठीक यही दर्पण चेतेश्वर पुजारा का है जिनका शुरुआत के 40 टेस्ट तक बल्लेबाजी औसत 60 के करीब था ।
*आंकड़ों के दर्पण में इन बल्लेबाजों का विशुद्ध स्वरूप~
*मोहिंदर अमरनाथ
टेस्ट 69
रन 4378
बैटिंग औसत 42.50
शतक/फिफ्टी 11/24
उच्च स्कोर 138
*दिलीप वेंगसरकर
टेस्ट 116
रन 6868
बैटिंग औसत42.13
शतक/फिफ्टी 17/35
उच्च स्कोर 166
*गुंडप्पा विश्वनाथ
टेस्ट 91
रन 6080
बैटिंग औसत 41.93
शतक/फिफ्टी 14/35
उच्च स्कोर 222
*सौरभ गांगुली
टेस्ट 113
रन 7212
बैटिंग औसत 42.17
शतक/फिफ्टी 16/35
उच्च स्कोर 239
*नवजोत सिंह सिद्धू
टेस्ट 51
रन 3202
बैटिंग औसत 42.13
शतक/फिफ्टी 9/15
उच्च स्कोर 201
*वीवीएस लक्ष्मण
टेस्ट 134
रन 8781
औसत 45.97
शतक/फिफ्टी 17/56
उच्च स्कोर 281
*मोहम्मद अजहरुद्दीन
टेस्ट 99
रन 6215
बैटिंग औसत 45.03
शतक/फिफ्टी 22/21
उच्च स्कोर 199
*विरेंद्र सहवाग
टेस्ट 104
रन 8586
बैटिंग औसत 49.34
शतक/फिफ्टी 23/32
उच्च स्कोर 319
*सचिन तेंदुलकर
टेस्ट 200
रन 15921
बैटिंग औसत 53.78
उच्च स्कोर 248 नॉट आउट:
*राहुल द्रविड़
टेस्ट 164
रन 13288
बैटिंग औसत 52.31
शतक/फिफ्टी 36/63
उच्च स्कोर 270
*सुनील गावस्कर
टेस्ट125
रन 10122
बैटिंग औसत 51.13
शतक/फिफ्टी 34/45
उच्च स्कोर 236 नॉट आउट
*विराट कोहली
टेस्ट 104
रन 8119
बैटिंग औसत 48.90
शतक/फिफ्टी 27/28
उच्च स्कोर 254 no
चेतेश्वर पुजारा
टेस्ट 98
रन 7014
बैटिंग औसत 44.39
शतक/फिफ्टी 19/34
उच्च स्कोर 206 no
नोट : रोहित शर्मा ने 45 टेस्ट खेले है और वो वर्तमान क्रिकेटर बने हुवे है इसलिए उनके बैटिंग औसत को इंगित किया है~~~
टेस्ट 45
रन 3137
बैटिंग औसत 46.13
शतक/फिफ्टी 8/14
उच्च स्कोर 212
ठीक इसी तरह विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा का भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर जारी है और दोनो क्रमशः 104 और
98 टेस्ट खेल चुके है और शुरुआत में इन दोनो महारथियों का बल्लेबाजी औसत बहुत उच्च यानी 60 के करीब शरीब था लेकिन उम्र और वक्त के साथ उनका प्रदर्शन थोड़ा फीका हो गया और बैटिंग औसत 50 से भी नीचे आ गया यानी समय के साथ सूरज की रोशनी मध्यांतर पश्चात न्यून होता है वैसे खेल में भी वक्त के साथ प्रदर्शन फीका होता है !
इस आलेख में मैं बात कर रहा हूं जो ओवरऑल वरीयता में 9 वे पायदान पर विराजित हैं लेकिन अपने दौर में अपने समकालीन साथी बल्लेबाजों में मोहिंदर दूसरे नंबर पर हैं उनसे आगे सिर्फ सुनील गावस्कर हैं । मोहिंदर अमरनाथ का प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया ,पाकिस्तान एवम वेस्ट इंडीज के विरुद्ध बहुत समृद्ध रहा बाद में इंग्लैंड वेस्ट इंडीज के विरुद्ध उनका प्रदर्शन बड़ा फिसड्डी रहा इस वजह उनका ओवरऑल प्रदर्शन प्रभावित हुवा और बल्लेबाजी ओसत भी !लेकिन सनी के बाद जिम्मी नंबर वन रहे और जमीनी तौर पर इमरान खान और माइकल होल्डिंग ने उन्हें श्रेष्ठ माना तेज गेंदबाजों के समक्ष। जिम्मी हुक शॉट के उस्ताद रहे यहां तक की सचिन तेंदुलकर ने उनसे हुक शॉट की स्पेशल ट्रेनिंग की ,पुल शॉट के भी वे माहिर रहे!
यदि समालोचना की नजर में शास्त्रीयता के पैमाने मापे तो कोहली पुजारा राहुल द्रविड़ सहवाग वीवीएस लक्ष्मण मोहिंदर अमरनाथ से अग्रणी नहीं माने जा सकते है चाहे उनके आंकड़े समृद्ध एवम विपुलता से लब्ध हैं।
*Nk सनातन