खेल में आरक्षण नही !
अच्छा हूवा महान अंबेडकर जी ये लिख कर गए नही
क्योंकि
उनको पता था
उन्होंने अपना कद आरक्षण से नही अपने बुद्धि बल से बढ़ाया
लेकिन हां तथाकथित ब्राह्मणवाद एवम जमीदार वाद से इक तबका शोषित था समानता से वंचित था अवसर से वंचित था की आह को उस पुरोधा ने समझा और इक दलित होने की पीड़ा उन्होंने भोगी उस पर उनका मनन सही हो विशेष आरक्षण की वकालत सही था….
और साफ है खुद ने और महान चंद्र गुप्त मौर्य,
ऐक्लव्य ,कर्ण को कोई आरक्षण नही मिला था उन्होंने अपनी प्रतिभा से हांसील किया था
लेकिन हां अंबेडकर को अवसर मिला …चंद्रगुप्त को अवसर दिया और महान एक्लव्य ने जब नकारा गया उच्चता और निम्नता के नाम तो खुद ने हासिल किया…
आज व्यवस्था का छद्म राजनीतिकरण हो गया और सौ में से सिर्फ पांच लोग मलाई खा रहे है यानी सुविधा भोग रहे है …जबकि कहने को सबके लिए समान अवसर हैं
जय भारत !
*Nk सनातन