★ दुनियावी अबोल★
■नफरतों का आलम है ओर माहौल ज़हरीला ;
मैं अपने आप को पाक-साफ़ कैसे कह दू
मैं भी तो इसी मंझर पे फिदा हूँ !
*NK सनातन
■ ये सत्ता चीज ही ऐसी है कभी गरज, कभी बेगरज
मगर इसकी भूख से कई हुक्मरानों हलवाई बने हैं !
Nk Sanatan
■ ये सत्ता चीज ही ऐसी
गरज कभी बेगरज ।
सख्त से सख्त हुक्मरानों इसके पीछे यकायक पिघाले हैं ।
*nk सनातन
■हमने यूँ ही हाथ नही खिंचे हैं जनाब
तुम इसे थूक के चाटना कहते हो
लेकिन सनद रहे ये चाटा गया थूक फिर तुम पर ही आएगा
ये सियासती रस्म है आंसुओ का व्यापार है
इसी से हम सब हुक्मरान ताज ऐ खास हुक्म के इक्के हैं ।
Nk Sanatan
■पहले मारा जाता है फिर मुआवजा दिया जाता है
असली आंसुओ पर घड़ियाली आंसुओ का यू सियासती खेल बदस्तूर खेला जाता है !
जनता भोली है भूल जाती है
ओर रंगसियार भीर शेर बन जाता है !
*NK सनातन
■काश की मोहब्बत भी एक व्यापार होता ;
चाहे इतना खरीदा चाहे इतना बेचा जाता !
*nk सनातन
■ यू तो बाजार है मर्दों की सुविधा के की मोहब्बत के मारे चले जाते हैं मन बहलाने
लेकिन उन मोतरमाओ का क्या जो मोहब्बत की मारी होती हैं !
*nk सनातन
■मैं अपनी मोहब्बत को भले समंझा दू की भुल जा उस बेवफा को
लेकिन कमबख्त इक जिस्म भी तो है मेरा इसे मैं कैसे समजाऊ !
*nk सनातन
■ यू तो बाजार हैं मर्दों की सुविधा के लिए बाजार में
की मोहब्बत के मारे चले जाते हैं सब कुछ भुलाने
लेकिन उन मोतरमाओ का क्या जो मोहब्बत की मारी होती हैं !
उसने कहा औरतों को हमने देवी बना रखा है इसलिए उनकेँ लिए हमने बाज़ार नहीं घरद्वार से मंदिर सजा रखे हैं
आदमी और औरत में बड़ा फर्क औरत धरती है सब सह सकती है आदमी ज्वालामुखी सह नही सकता फट ही पड़ता है रह रह कर !
*nk सनातन
■ मोहब्बत के मारे मयखाने चले जाते हैं सब कुछ भुलाने
इस कड़ी में ख़वातीन कहाँ जाए जरा बताए
इस कड़ी में एक मोहतरम बोले
आप ही जड़ है इस आईने की कि गर आपकी बिरादरी में बेवफाई के पहलू न होते
न ये मैखाने होते न ये लत होती।
*nk सनातन
■ यदि बेवाफ़ाई का सर्वे किया जाय
तो शर्तिया पुरुषों का प्रतिशत अधिक बैठेगा ।
*NK सनातन
■ वासना कभी चेहरा नहीं देखती
ओर मोहब्बत भी
तो फिर दोनों में क्या अंतर
बस यही की एक क्षणिक तो एक अनंत !
*nk सनातन