■ जीवन ने स्थिरता असम्भव ! ■
जीवन मे स्थिरता आ गयी सोचना ईश्वरीय खयाल है ….
यानी फिज़ूल है क्योंकि जीते जी ये सम्भव नहीं है
अस्थिरता ही इस सांसारिक जीवन की प्रकुति है
सो सोचता था…या सोचे मत..
की जितना बुरा होना था हो गया
सोच कर आश्वस्त था, थे जिंदगी के इस पड़ाव पर
लेकिन ये जिंदगी भी कहां छोड़ती है किसी को मरने से पहले या मरने तक !
सुखात्मक रूप से सताती है
दुखात्मक रूप से तड़पाती है
यानी मुसीबतें तो जिंदगी का तोहफ़ा हैं
हँस के स्वीकारो,या रो के
जिंदगी को फ़र्क़ नहीं पड़ता
बस आदमी को फ़र्क़ पड़ता है !
*NK सनातन