◆ ★गीत: यारियां फिर इश्क़िया ★◆
इश्क करना नही था हमको हो गया है
ओ-२२२२ हम क्या करे-2
जमाना पहले भी दुश्मन इश्क का अब भी है ओ हम क्या करे-2
ये जमाना इश्क करने वालों पर कब मेहरबा हुवा है जो अब होगा
मोहब्बत पे नही कभी वो वारा ओ हम क्या करें
रोमियो-जूलियट,
सिरी-फ़रहाद,ढोला-मारू
सोहनी-महिवाल
नीलकमल-चित्रसेन या दीवानगी का चरम जोड़ा हीर ओर उसका रांझा
कोई जमाना ,कोई समाज कोई कबीला नही पचा पाया ये मोहब्बत का जलवा ओ हम क्या करें
सब का रहा एक ही आईना जुल्मों सितम का
घ्रणित कृत्य अपच लड़ी आंखों का किरकिरा
ओ -2 बताओ हम क्या करे
आधुनिक जमाने की बदली हवा
मैं लड़का तू लड़की दोस्ताना हुवा
ये दोस्ताना गहराते गहराया
ओ-2 हम क्या करें
ओर जाने कब प्यार हुवा कब दिल ऐ इकरार
दीवानगी का आलम न पूछो न दिन को चेन ओ करम
ना रात को सुकूँ आराम
बस याद ही याद
ओ-2 हम क्या करें
यादो में दिल दिलरुबा आब ओ हवा मीठी मीठी
चारो तरफ भवरों की गुंजन
ओर फूल-कलियां-तरु गुलजार ही गुलज़ार
लगता नही मिलन बिन जी
ओ–2 हम क्या करें
पाक साफ दिल ऐ मेहताब
है अपना प्यारम्म प्यार
लेकिन जमाना भी सही था
के दो विपरीत लिंगी शख्सों में मित्रता
नए जमाने का चलन हो चाहे
सो प्यार तो होना ही था
ओ हम क्या करें
ये प्यार मोहब्बत भी नैसर्गिक
कब किसी से हो जाय अनायास
हाय एक दूजे से हो गया बातों ही बातों में
ओ-2 हम क्या करें
ये फ़लसफ़ा जमाने पर रहा है भारी
लेकिन क्या करे चाहे है जमाने की रुसवाई
प्यार जुर्म है तो वो हमसे हो गया
ओ-2 हम क्या करें !
जाति-धरम-समाज की न हो गर बिसात
तो यारो किस को कहा है मोहब्बत पे ऐतराज
हो चाहे फिर किसी से
बस सबकी हामी नहीं किसी का ना
लेकिन खुन्नस जमाने की तीखी आंखे
ओ-2 हम क्या करे !
लेकिन जमाना बदल रहा है
हिन्दुस्तान भी ईस्ट से वेस्ट में ढल रहा है
गंधर्व विवाह के लव मेर्रिज का चलन स्वीकार्य हो रहा है !
तो दे दो ऐ जमाने वालो हंमे अपनी हां
अब कुछ नहीं हो सकता
कानून भी हमारे पक्ष में
ओ-तुम भी कुछ नही कर सकते
ओर हम करे तो करने दो इश्के यार
ओ-22 हम प्रेमी है हम तो करेंगे प्यार
पानी सर से ऊपर
अब रुक नही सकते
ओ हम क्या करे !
*nk सनातन