मंझील…..!!!!!?????

मंझील…..!!!!!?????

मंझील….??
ऐ जहां के आदमी मैं जिंदगी हूँ
तेरी कोई भी मंझील हो
मेरी तो सिर्फ एक ही मंझील है।
*जिंदगी रफ्तार से गुज़र रही है
सफर चल रहा है जाने कब तक
पड़ाव के नाम सिर्फ बेचेंन राते ही आती हैं
जीवन मे पाकर खोने वाली मंजिलें तो बहुत है
पाने वाली मंझील तो सब की सिर्फ़ इक ही है……..
मौत मौत मौत मौत
मौत ।
*nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

Leave a Comment

Keep reading

You may also like

कुछ दर्शन के तीर! Hindi

कुछ दर्शन के तीर!

कुछ दर्शन के तीर उसकी ओर उसकी मोहब्बत में फर्क बस इतना था .. की उसके जनाजे के पीछे थे तो हज़ारो…

April 14, 2021 Read →