कुछ ख़याल ऐ इश्क़

कुछ ख़याल ऐ इश्क़

कइयों ने बहुत उंगलियों उठाई और तानाकशी भी की,
हाँ मेरे किरदार को लेकर-2
लेकिन हम जरा सा भी न बदले
लेकिन उन्होंने -2
हां उन्होंने कुछ कहा नही
सिर्फ देखा भर मुखालफत भरी नज़र से
की फ़िर देखो मैं रंग बासन्ती हो गया
उन सब हक में जो सताये थे
जज्ब इलाही लेकर
मै सरफ़रोशी , मैं इंकलाबी हो गया
कुछ लोग बागी कहने लगे मुझको-2
ओर समझो अपना काम हो गया
फिर लगने लगे हक में नारे
सारे साथ मेरे हुजूम को लेकर
ओर मैं उनकी पुरजोर आवाज़ नेता उनका आम
सत्ता ओर विरोधियों के के लिये खास हो गया।
*Nk Sanatan
जाने क्या मिठास है तेरी नस्लो में वाज़िद।
हर कोई तेरे खून का तलबगार नज़र आता है
**अज्ञात but पोस्टेड by वाज़िद साब in काव्यांगन
इस शेर के जवाब में मेरा जवाबी शेर–
बात मुझ अज़हा की है नस्ले बिसात पर
कोई कौम नही छोड़ती-2
वो ईद तो वो बलि
इससे इतर सब शौक ऐ बला !
*NK Sanatan
तेरे ओर मेरे जीने में बस फर्क इतना सा है
की कि तू जी- जी के मर रहा है और मैं मर -मर के जी रहा हूँ !
*Nk Sanatan
मौत एक मात्र प्रकृति है जो आदमी को तुच्छ बनाती है ।
नैतिकता मनुज को इंसान बनने का सुअवसर देती है ।।
NK सेवक “सनातन”
जिंदगी क्या है मानो तो बहुत कुछ-2
नहीतर कुछ नही
सिर्फ़ आज के कल होने की रंगी-फीकी दास्तां है।
*NK सेवक “सनातन”
है और चला गया कि तर्ज़ पर दुःखी था-2
था चला गया गया तो गया अपना क्या गया कि तर्ज़ पर सुखी हूं ।।
*NK सेवक “सनातन”
इंसान धरती पर जीवित रह सकता है बिना प्रयास के
मछली पानी मे
मेढक ,मगरमच्छ, केचुआ जल-थल दोनों में
लेकिन जो शक्ति अदृश्य है तीनों में
जल-थल-अम्बर
ओर उसी शक्ति को सर्वशक्तिमान कहते हैं ।
*NK सनातन
उसकी झूठी कसम से वो उस समय तो जी गया
लेकिन मैं उसी समय मर गया
लेकिन कुछ अरसे बाद आलन ये था कि
वो तिल-तिल मर रहा था और मै सदा के लिए जी उठा था।
*NK सेवक “सनातन”

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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