“आजादी के मायने”
अटल ने कहा-आजादी अभी अधूरी है
रवि की शपथ-अब तक न पूरी है
आजादी के अब तक सत्तर साल देखे हैं
क्या ये कहना अब भी लाजमी है
नही नही ऐसा हरगिज़ नही है
गिलास खाली है सोच अधूरी है
इस महावधि मे पाटी हमने बड़ी दूरी है
दरमियाँ दस दशक सत्तर सालो में
लोकतंत्र मजबूत के हूवा कमझोर
देशजन इस पर मंथन बहुत जरूरी है
राष्ट्र सर्वोपरि सोच बड़ी महत्ती है
सत्तर सालों में शासन की रही जो धूरि है
वही कांग्रेस पार्टी अस्तित्व को तरस रही है
मात्र 46 पर ठहरी जड़े खोखली हो ली हैं
स्वतंत्रता की मुखर दल गर्त में अब
विपक्ष अब सत्तासीन मूसल- ओखली है
गणतंत्र में विपक्ष भी हो मजबूत
जिससे सत्तारूढ़ न बने निरंकुश
जरूरी बहुत जरूरी लोकतंत्र प्रकृति है
लेकिन चहूं ओर बस यही चिंता
विपक्ष बडा बिखरा ओर हताश पंगु है
इसलिए सत्ता को कोई प्रतिपक्ष
दे बड़ी कड़ी टक्कर श्रेयस्कर
सो कोई राजनेता सत्तापक्ष
नशे में कतई तनिक भी न रहे
ये भ्रम भी तोड़ना जरूरी है-2
*71 वे स्वाधीनता दिवस पर भारत वासियों मेरे को समर्पित
दिनाँक: 13 अगस्त 2017
* nk सेवक “सनातन”