मनबसिया मोहन से कदम (Steps Toward Enchanting Mohan)
Hindi (यूनिकोड)
मनबसिया मोहन से कदम
मोहन का साया, है मुझे भाया,
है क्या रसीला, क्या अजब रसीला,
मुरली भी जिसकी, ने लुभाया,
ऐसे ब्रज मोहन का साया, मुझे बहुत रास आया,
तभी दीवानगी का आलम बेचैनी का मारा,
ढूंढता हूँ एक राधा – 2 नजर पड़ी मेरी, तुम पे थम गयी है।
कहता है मन – राधा का रूप हो तुम,
पर राधा नही हो तुम, मोहिनी हो तुम बहुत खूब,
फिर क्यों राधा नही हो – 2
जमुना का तट है यहाँ नहीं, और पनघट भी नहीं,
है तो बहुत रूपसियाँ ललना, पर राधा सी कोई नहीं,
मन में ऐसे में कृष्ण उतरे है मन बसिया बन,
मदन बन गया है मोहन भी हूँ,
पर लिए उसके राधा जरूरी हैं,
अफ़सोस -यहाँ राधा कोई नहीं है
प्यार की घटाए उमड़ रही है, नाचू मैं श्याम मुरारी बनकर,
पर राधा भी तो जरूरी है,
डोलू मैं कान्हा बन कर, छेड़ू तान मुरलीधर बन कर,
सुनाऊ गीत कोई मीठी धुन,
पर क्या करू एक राधा जरूरी है,
और हाय सब कुछ है पर राधा ही नही है।
नरेश कुमार ^सनातन*