Bhakti
व्यंग्यम रामबाणम अनुरंजक पर नीतिपरक!
★ व्यंग्य बाण लेकिन अनुरंजन★ ◆ सूरज बांटा, चंदा बांटा धरती भी.. शुक्रिया क्योकि इन्हें बांटना मानव- तेरे बस मे नहीं !…
Poems, ghazals, bhajans, satire and articles — Hindi & English
Bhakti
★ व्यंग्य बाण लेकिन अनुरंजन★ ◆ सूरज बांटा, चंदा बांटा धरती भी.. शुक्रिया क्योकि इन्हें बांटना मानव- तेरे बस मे नहीं !…
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1मई अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस 【मेरी गद्यात्मक तकरीरि अकविता 】 कार्ल मार्क्स ओर एंजेल ने सर्वहारा वर्ग को जान दी पूंजीवाद को चुनोति…
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★जन्मदिन लो मैं फिर आ गया आपकी बधाइयां-आशीष लेने★ छोटे थे तो बड़े होने की बड़ी तल्ख थी… ओर बड़े होने का…
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मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम श्री जनार्दनः कृष्ण दोनो मेरे आराध्य लेकिन आदर्श किसे बनाऊ एक तरफ जालिम दुनिया है श्रीराम को अपनाऊं तो…
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*कानून की परिकल्पना ओर प्रादुर्भाव..! गीदड़ ( भेड़िये ) कल्चर को देख कर कानून निर्माण इक कमज़ोर व्यक्ति के मन मे आया…
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कुछ दर्शन के तीर उसकी ओर उसकी मोहब्बत में फर्क बस इतना था .. की उसके जनाजे के पीछे थे तो हज़ारो…
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मंझील….?? ऐ जहां के आदमी मैं जिंदगी हूँ तेरी कोई भी मंझील हो मेरी तो सिर्फ एक ही मंझील है। *जिंदगी रफ्तार…
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*तब भी ,अब भी – आईना यही था यही रहना है ! सीता हरण तब भी हुवे चिर हरण द्रौपदी के सरे…
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अब….! अब फूलों पर मकरन्द नहीं मंडराते क्योकि फ़िज़ा में अब वो बहार नही फूलों में वो मधु धार नही भौरों की…
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[29/03, 10:47] Nk Sanatan: एक गरीब के पास रंग वैसे भी कहाँ होते हैं एक पानी-धूल-मिट्टी ही तो है जो बेमोल है…