अगर लाश खुद उठ जाए जनाजे में !

अगर लाश खुद उठ जाए जनाजे में !

*लाश अगर उठ जाए तो
[°जनाजे में ~शवयात्रा में जाना मजबूरी है !!!!°]

जी हां जनाजे और शमशान पे जाना शत प्रतिशत मजबूरी है !
कौन कमबख्त शौक से वहां जाता है
अगर शक किसी को जरा भी
तो भई नारको टेस्ट करवा ले !! Nk
आगे देखें व्यंग्य विनोद की कड़ी में ~
वो मर गया है जनाजे में तुम आओ न आओ कोई फर्क नहीं पड़ेगा !
मगर जो ओपचारिक और अनमने ढंग से आये है जनाजे में इसके !!
भाग जायेंगे दोनो ही मने~ अनमने आए है मय्यत में इसके !
अगर वो उठ गया~2 इक बार अपनी अर्थी से!!

*NK सनातन
With humour and satire

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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