अफलातून खयाल ऐ सांसारी मोहब्बत
अकविताई ये दुनिया अकविता करता हूं
यूं तो कई व्याकरण,छंद वृंद , विधाएं ,अलंकार ~
अतुक ये दुनिया !
मन से बढ़ कर कोई विधा, दुविधा नहीं ;
बस मन की कहता हूं !
चाहे कह दे गद्य ,पद्य
बस अकविता में कविता कहता हूं!!
सारे गीत, गजल नायब लिख लिए गए है ;
कोसू या करू तारीफ !
लिए मेरे कुछ नही बचे हैं
कोई ताजा व्यंजन में व्यंजना अभिधा आ जाए तो ठीक
वरना जूठन के निवाले बचे है
इक बार इसी बात पर सुमित्रानंदन पंत गुस्साए तुलसी पर
की जो काम उन्हे करना था
वो कर गए
लेकिन जो काम महान वाल्मीकि कर गए
तुलसी ने भी तो किया
चाहे उन्होंने अवधि को चुना
वैसे नई बोतल में पुरानी शराब
बस किस्से हिस्से रह गए हैं
पॉप में पाप जाज में बेसुरा पुण्य लिखता हूं
शास्त्रीयता हैं गायब दुनिया में
कौन तुलसी ,कालिदास
कौन मीर ,गालिब शेक्सपियर, वर्डजवर्थ मारलो, मिल्टन लिखता है
व्यवसाईक दुनिया में नाम जिसने इक बार बनाया
फिर वो कुछ भी कह दे लिखदे
पाठक श्रोता उस पर भरमाया, ललचाया
की हर कोई वाह ही कहता है
कैसे बनू कुमार विश्वास, अख्तर जावेद, गुलजार शैलेंद्र
उनके भी संघर्ष के बड़े किस्से है !
आंग्ल भाषाई लेखक चेतन भगत , स्वर सजनी महान लता,मेघा सुपर स्टार अमिताभ, दत्त सुनील ,शत्रुघन प्रसाद सिन्हा नकारे गए
हकीकत तकदीर का फसाना
हर कोई चाय बेचने वाला प्रधान मंत्री कहा बनता है !
*Nk सनातन