आजकल लोग कवि सम्मेलनों में कविता सुनने कहां जाते है वो जाते हैं इसलिए की भौतिक जिंदगी से इतर मन को कोई राहत मिल जाए क्योंकि हर कोई आहत है…. हर श्रोता यही चाहता है की बस किसी तरह हंसी आ जाए और आयोजक भी यही चाहते की कवि टोली किसी तरह हंसा हंसा के लोटपोट कर दे….. सुरेंद्र शर्मा साब जो पत्नी पीडित समाज के शुभचिंतक और ये पीड़ा सुना सुना कर उन्होंने अपनी वित्तीय पीड़ा समाप्त कर दी हां बालकवि बैरागी जी को सुना वाकई मननीय कविता की श्रोता यदि बुद्धिजीवी तो मंथन को मजबूर हो जाय….
कवि समाज भी विवश की वही सुनाए चाहे तोड़ मरोड़ जोड़ छोड़ की श्रोता कुछ हंस ले…
यानी असल कवि का बाजार भाव और बाजार कम गर्म बनिस्पत के हास्य कवि….व्यंग्यकार नगण्य है जो भी है फिसलन वाले…..कुमार कोई दीवाना कहता है….से आजतक चल रहे है…आपकी दर कविता पढ़ने की तब बढ़ गई जब आप आप के होकर प्रवक्ता बने राहुल जी के सामने खड़े हुवे चु….नाव !!!!
अब आप पहले राजनेता बनाते अटल जी की तरह फिर कवि बनते तो राजनेता के रूप PM बन सकते थे….लेकिन आपने पढ़ाई की वो भी गहन डॉक्टरेट आपने महान मोदी जी की तरह बिना पढ़ाई (जैसा की अरविंद केजरी राहुल वगेरह डिग्री मांगते है,कहते है सवाल उठाते है मोदी जी की शिक्षा पर) के ही पहले CM फिर पीएम बन सकते थे PM बनाने के लिए डॉक्टरेट जरूरी थोड़े न है बेचारे Dr मन….मोहन थे लेकिन डमी… सोनिया जी 10 जनपथ से असल कमांडर…
अमिताभ बच्चन साब ही खुद कॉमेडी कर कई दिग्गज कॉमेडी अभिनेताओं की रोजी रोटी छीन ली…अब राजू श्रीवास्तव,सुनील पाल, अहसान कुरेशी,अलबेला…ये असल हास्य कलाकार या कवि …!!! कवियों ने हंसाना शुरू किया ये बेचारे कामधंधे के मारे हो गए…अब कही लाफ्टर शो नही होते..!!!
*Nk सनातन