■ मृत्यु की पहेली में उलझे लोग सुलझाते सुलझाते खुद सुलझ गए समय के साथ , सुलझाते भी कैसे ये अबूझ पहेली क्योकि
बस एक यही तो हथियार है उस महाशक्ति का जिससे दुनिया झुकती है उसके आगे , उसके नाम पर , सिर्फ इसी प्रकुति से दुनिया हारी है और हारती आई है ओर हारती जा रही है , इस अंतिम सत्य का कोई तोड़ नही है ओर इसलिये इसे अंतिम सत्य के रूप में स्वीकारना सब की धुरी या के विवशता है !
■मनुष्य ने कई असाध्य रोगों पर विजय प्राप्त कर ली है सिर्फ़ समय ,उम्र और मृत्यु पर विजय प्राप्त करने के बाद मनुष्य शर्तिया नास्तिक होकर स्वयम भगवान बन जायेगा !
*NK सनातन
■ तेरी जफ़ाओं पर तेरी वफ़ाये भारी हैं ।
तुझे मैं इल्ज़ाम दू तो क्या दू !।
■ मेरी जफ़ाओं पर तेरी वफ़ाऐ भारी ;
जाँनिसार तुझे मैं इल्जाम दू तो क्या दू ।
■ हर मोहब्बत की दास्तां अधूरी है !
लेकिन इक वो पूरी से भी ऊपर पूरी है !!
जरा राधा-मोहन के किस्से देखो , दिल ऐ नजराना-खजाना देखो,
जिस पर सजदे हर काल से जारी है ;
जो पूर्णता से भी ऊपर या कहे भारी
पूरी संपूर्णता की ये अधूरी प्रेम कहानी
प्रेमग्रंथो का केन्द्र बिंदु या के धुरी है ।
*nk सनातन
■हर मोहब्बत में पहले वफ़ा फिर जफ़ाओं का जिक्र आम ओ खास है गिलो -शिकवों को लेकर,
लेकिन अपनी मोहब्बत का आईना कुछ जुदा है ; जफ़ा है नगर नही भर वो भी खुदाई वफ़ा ,मोहब्बत के नाम पर !!
*nk सनातन
■ मृत्यु की पहेली सुलझाने वाले सुलझ गए
बस एक यही तो हथियार है उस महाशक्ति का जिससे दुनिया हारी है और हारती आई है ओर हारती जा रही है ,कोई तोड़ नही ओर इसलित अंतिम सत्य के रूप में स्वीकारना सब की धुरी या के विवशता , मजबूरी है !
*NK सनातन
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