खून के रिश्तों के समुराई खूनी किस्से !
दो सगे भाई एक माँ के जने
पिता के लाडले राज दुलारे
बचपन,लड़कपन कैशोर्य ओर वयस्क
सब साथ साथ प्यार दिलदार ही अयस्क
फिर दुनियादारी में कदम यानी शादी
ओर फिर बहुएं कौशल्या कैकेयी
पिता मजबूर है भगवन क्या चलन रचाई
फिर कौरव-पांडव पितृ-सत्ता सम्पत्ति
ओर शुरू अटल महाभारताई
परिणाम वही आँसु ओर बेरुखाई
सगो के सगे बने कौरव कौरवाई
सुयोधन अब दुर्योधन दुशासन आतताई
उधर युधिष्ठिर, अर्जुन भीम नकुल सहदेवाई
धर्मसंकट भौतिकी कृष्ण कहे बन धर्माई
प्रेम और समर में सब रिपु कोई नही रिश्तेदारी
हक के लिए धर्म युद्ध लेकिन परिणाम
हां परिणाम कुछ नहीँ सिफ़र यानी शून्याई
फिर सफर अंतिम पड़ाव के मोड़ पर
सोचता मन क्या सही क्या गलत भर
कभी मुदित कभी क्षोभ ये जीवन है ललचाई
इस तरह आध्यात्म होते हुवे भी बह जाता धारा भोतिकाई !!!!!
*NK सेवक “सनातन”