जिसने भी कही!

जिसने भी कही!

कितने अमीर – कितने ग़रीब,
कितने पीर – कितने फ़क़ीर,
कितने नबी, कितने अली,
कितने वली कितने कबीर,
कितने ईसा, कितने मूसा,
कितने नबी, कितने सूफ़ी,
कितने हज़रत, कितने मोहम्मद,
कितने उलेमा, कितने वल्लाह इब्राहिम,
कितने औलिया, कितने मौलवी,
कितने रकीब, कितने हबीब,

खिंचते एक ही लकीर,
फ़लसफ़ा ज़िंदगी का एक तक़रीर,
ज़िंदगी बस बनती बिगड़ती तस्वीर,
ज़िंदगी नाम एक तरकीब,
पाक-नापाक कर्मों भरी,
कभी हसीन – कभी बोझिल,
लगती चलती ज़िंदगी,
ऐसे वैसे कैसे जैसे।
ख़त्म होती ज़िंदगी।

— नरेश कुमार ^सनातन*

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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