तेरे नाम का एक दीप जलाया,
मन के अँधेरे कोने में रखा;
हवा चली, लौ काँपी पर बुझी नहीं —
भक्ति की बाती कभी छोटी नहीं पड़ती।
तेरे नाम का एक दीप जलाया,
मन के अँधेरे कोने में रखा;
हवा चली, लौ काँपी पर बुझी नहीं —
भक्ति की बाती कभी छोटी नहीं पड़ती।
Bhakti
★ व्यंग्य बाण लेकिन अनुरंजन★ ◆ सूरज बांटा, चंदा बांटा धरती भी.. शुक्रिया क्योकि इन्हें बांटना मानव- तेरे बस मे नहीं !…
Bhakti
“कृष्ण~सुदामा अमर मैत्री गाथा” हरी मन्नारायण नारायण नारायण सुदामा चले अनमन लिए उलाहने सुन सुन पत्नी प्रिए, पहुंचे ज्यों त्यो हजार कोस…
Bhakti
कुछ ब्रह्मांडीय विचरण ” मनुष्य जन्म ही धर्म के नाम अधर्म से होता है जिसमे पवित्रता ढूंढना अप्राकृतिक अवधारणा होकर बेईमानी है…